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Prof. Tariq Mansoor is presently serving as the Vice-Chancellor, Aligarh Muslim University, Aligarh. Previously he has also served as Principal, J.N. Medical College, Chief Medical Superintendent, J.N. Medical College Hospital and Chairman, Department of Surgery. He is also the member of Medical Council of India since March 2015 for a period of four years. He is product of the first batch of prestigious Our Lady of Fatima Higher Secondary School, Aligarh. During his school days he has served as House Captain as well as School Captain. He did his MBBS and MS in General Surgery from Jawaharlal Nehru Medical College, AMU, Aligarh. A surgeon by profession with special interest in Breast and Thyroid Diseases, Prof. Tariq Mansoor has 33 years of Teaching and 35 years of Clinical experience. He has 90 publications to his credit and has guided 49 Postgraduate Medical Students for their Thesis as Supervisor / Co-Supervisor

डा0 सैयद हुसैनी ने 24 शिक्षण संस्थायें कायम कर सर् सय्यद के मिशन को रफ्तार दी : प्रोफ शकील समदानी

डा0 सैयद शाह खुसरो हुसैनी ‘मोहसिने मिल्लत’ अवार्ड से सम्मानित

अलीगढ़ 01.11.2018। सर सैयद अवेयरनेस फोरम के द्वारा आज पॉलीटेकनिक सभागार मुस्लिम विश्वविद्यालय में ‘आधुनिक शिक्षा एवं मुसलमान’ नामक विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें ख्वाजा बन्दा नवाज विश्वविद्यालय गुलबरगा (कर्नाटक) के चांसलर डा0 सैयद शाह खुसरो हुसैनी को फोरम की ओर से ‘‘मोहसिने मिल्लत’’ का खिताब दिया गया। मुख्य अतिथि श्री खुसरो हुसैनी ने कहा कि शिक्षा मुसलमानों के लिये अत्यधिक जरूरी है। आज का युग केवल उन लोगों को पसंद करता है जो हालात में अपने को ढाल लेते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस्लाम धर्म सबसे आधुनिक धर्म है और यदि इसको अपनी जिन्दगी में ईमान्दारी से ढाला जाये तो सिवाये तरक्की के कुछ नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि मैं सर सैयद का हमेशा से प्रशंसक रहा हूं और इसी कारण मैंने सर सैयद के शिक्षा के मिशन को बढ़ाने की कोशिश की है।
अध्यक्षता करते हुए अमुवि के प्रो वाईस चांसलर प्रो0 हनीफ बेग ने कहा कि आज के युग में आधुनिक शिक्षा की बात करना अति आवश्यक है। सर सैयद ने आधुनिक शिक्षा ग्रहण करने के लिये बहुत कोशिश की और इसी कारण उन्होंने जगह जगह शिक्षण संस्थायें खोलने की कोशिश की। उन्होंने आगे कहा कि इस्लाम सहिष्णुता का संदेश देता है। अंत में उन्होंने छात्र छात्राओं का आवाहन किया कि वह सिविल सर्विसेज और जुडिशियरी में कामियाबी करने की कोशिश करें।


अमुवि रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद, आईपीएस ने कहा कि मुसलमान आधुनिक शिक्षा में बहुत कम है और सच्चर कमेटी ने इस सच्चाई को उजागर किया है कि मुसलमान अनुसूचित जाति और जनजाति से भी पीछे हो गये हैं। हालात केवल उच्च शिक्षा ग्रहण करने से दुरूस्त हो सकते हैं। उन्होंने छात्र छात्राओं का आवाहन किया कि वह विश्वविद्यालय में अपना समय बर्बाद न करें और शिक्षा की ओर ध्यान दें। उन्होंने सर सैयद अवेयरनेस फोरम के अध्यक्ष प्रो0 शकील समदानी को एक कामियाब सेमिनार करने के लिये बधाई दी।


फोरम के अध्यक्ष प्रो0 शकील समदानी ने कहा कि विश्व में मुसलमान कम से कम छः सौ वर्ष तक शिक्षा, साईंस आदि में आगे रहे और उसका कारण केवल संर्कीण भावनाओं से ऊपर उठ कर आधुनिक शिक्षा ग्रहण करना था। उन्होंने कहा कि सर सैयद के अलीगढ़ आन्दोलन को उत्तर भारतीयों के मुकाबले दक्षिण भारत के लोगों ने अपनाया और इसी लिये वह जिन्दगी के हर क्षेत्र में हमसे बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि डा0 सैयद हुसैनी ने 24 शिक्षण संस्थायें कायम की हैं जिसमें ख्वाजा बन्दा नवाज विश्वविद्यालय अहमियत का हामिल है। उन्होंने कहा कि हुसैनी साहब ने जिस प्रकार कर्नाटक में शिक्षण संस्थायें और गरीबों के लिये कार्य किया है वह हमारे लिये मशअले राह है। प्रो0 समदानी ने कहा कि हमने ‘मोहसिने मिल्लत’ अवार्ड देकर कोई अहसान नहीं किया है बल्कि उन्होंने इसको कुबूल करके अहसान किया है।
अब्दुल्लाह कालेज की प्रधानाचार्या प्रो0 नईमा गुलरेज ने कहा कि दक्षिण भारत में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हो रहा है जबकि उत्तर भारत में बहुत कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि पारसी समुदाय संख्या में बहुत कम है परन्तु जीवन के हर क्षेत्र में आगे है और यही कारण है कि वह देश के सर्वाच्च पदों पर बैठे हैं। उन्होंने इस बात पर अफसोस का इजहार किया कि मुस्लिम महिलाओं की स्थिति काफी दयनीय है जिसे सुधारने की जरूरत है।
ख्वाजा बन्दा नवाज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 अब्दुल जलील खां पठान ने कहा कि हुसैनी साहब को ‘मोहसिने मिल्लत’ अवार्ड दिया जाना एक सही कदम है जिसके लिये प्रो0 समदानी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि हमें देश में रतक्की करने के लिये सर सैयद के मिशन को आगे बढ़ाना होगा और शिक्षा के साथ क्वालिटी शिक्षा प्रदान करनी होगी।
डा0 मुहीबुल हक ने कहा कि दुनियावी शिक्षा की ओर मुसलमानों ने बहुत देर के बाद ध्यान दिया जिसके कारण वह पिछड़ गये। उन्होंने कहा कि सर सैयद अवेयरनेस फोरम ने टीपू सुल्तान ब्लॉक बनवा कर इतिहास बनाने का कार्य किया है और इसके लिये इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो0 समदानी बधाई के पात्र हैं।
इस अवसर पर अन्जुम तबस्सुम, गुलबरगा तथा तारिक हुसैन अमुवि को ‘एक्सिलेंस’ अवार्ड से सम्मानित किया गया। प्रोग्राम का सफल संचालन अमुवि छात्रा आयशा समदानी ने किया तथा वरिष्ठ छात्र मंसूर इलाही ने धन्यवाद प्रस्ताव किया। इस अवसर पर सारा ने उदभोदन से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। मशहूर शायरा रिहाना शाहीन ने अपना कलाम प्रस्तुत किया। डा0 रिहान अख्तर द्वारा मुख्य अतिथि का सिपासनामा पढ़ा गया। इस अवर पर ख्वाजा बन्दानवाज विश्वविद्यालय के प्रो चांसलर सैयद अली हुसैनी, सैयद हैदर पाशा कादरी, सज्जादा नशीन नीलंगा तथा कर्नाटक से कई अतिथि भी मौजूद थे।
अमन आलम ने फोरम के उद्देश्यों पर प्रकार डाला तथा वजाहत जीलानी ने अतिथियों का स्वागत किया। इस प्रोग्राम को कामियाब बनाने में हुसेन खालिद, एडवोकेट शोएब अली, प्रोग्राम इंचार्ज मुताहिर, हस्सानुल हक, फराज, हमजा नोमान मसूद, दानिश इकबाल, पवन वार्ष्णेय, फातिमा समदानी, छात्र नेता अजय सिंह, कोर्ट मेम्बर रॉस मसूद, फैज, प्रशांत, हिमांशु सिंह, फौजिया फातिमा, तलत अंजुम, सारिम अली, अजीम शेरवानी, रजिया चौहान, डा0 हैदर अली, काशिफ आदि का विशेष योगदान रहा।
इस अवर पर प्रो0 हुमायुं मुराद, प्रो0 खालिद आजम, प्रो0 अशहर अन्सारी, प्रो0 मुजीब अन्सारी, डा0 नसीम अहमद खान, प्रो0 कामिल, प्रो0 शकील, डा0 वसीम अली, डा0 अली नवाज जैदी, रबाब खान, डा0 नासिर अहमद, डा0 जफर अहमद, डा0 रहमतुल्लाह, डा0 रागिब, डा0 मोहसिन खान, अमुवि छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष खालिद मसूद, डा0 नजर अब्बास, अमुवि छात्र संघ के सचिव हुजैफा आमिर, अमुवि के कैबिनेट मैम्बरान तथा बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र छात्रायें मौजूद थे।


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