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प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की सरकार देश को विश्व में आर्थिक शक्ति बनाने मे सक्षमः डॉ० फ्रेन्क इस्लाम

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की सरकार देश को विश्व में आर्थिक शक्ति बनाने मे सक्षमः डॉ० फ्रेन्क इस्लाम
अलीगढ ने देश को दिशा दी, देश ने अलीगढ़ को दिशा दीः डॉ० फ्रेन्क एफ० इस्लाम

-डॉ० जसीम मोहम्मद

आजमगढ़ के मूल निवासी डॉ० फ्रेन्क एफ० इस्लाम ने अपने देश से दूर अमरीका मे व्यापार के क्षेत्र मे सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए है। केवल बारह वर्षों पूर्व 2006 मे उन्होंने अमरीका में 50 डालर निवेश करके एक कम्पनी क्यू०एस०एस० स्थापित की थी जिसको जब उन्होंने पेरोट सिस्टमस को बेचा तो उसकी मालियत 300 मिलियन डालर थी। फ्रेन्क इस्लाम के स्वाभाव मे शारिरिक और आर्थिक खतरे उठाना शामिल है। परन्तु एक तथ्य और है कि वे बाज़ार की स्थित को समझने मे भी पारंगत है तथा कौशल पर विश्वास करते है। केवल अपने व्यक्तिगत स्वभाव परिश्रम और कटिबद्धता के परिणाम स्वरूप उन्होंने अपने व्यापारिक संस्थानों को विकसित करने में अभूतपूर्ण सफलता प्राप्त की है।
फ्रेन्क इस्लाम का जन्म आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) के एक पस्पारागत मुस्लिम परिवार मे हुआ। वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र भी है। वे स्वंय कहते है, ‘‘अलीगढ़ में बिताये गए समय ने मेरे ऊपर बहुत प्रभाव छोड़ा है। अलीगढ़ ने मुझे जीवन के मूल तत्व प्रदान किए जिनके परिणाम स्वरूप मैं एक सफल उद्यमी बन सका। वे आगे कहते हैं कि, ‘‘अलीगढ़ ने मुझे उत्तम शिक्षा प्रदान की।’’
फ्रेन्क इस्लाम यूवावस्था मे ही अमेरीका चले गए थे। उनकी आँखों मे उच्च शिक्षा और व्यापार सीखने के सपने थे। उन्होंने अमरीका के कोलोराडो विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और बाद मे वाशिंगटन डी०सी० की दो सूचना तकरीकी सम्पनियों में कार्य किया जिनके द्वारा उन्होंने व्यापार करने के मूल तत्व तथा कौशल सीखा।

केवल 13 वर्षों में फ्रेन्क इस्लाम ने अपने कठिन परिश्रम से एक सूचना तकनीकी कम्पनी की स्थापना की और अपनी सकरात्मक छवि बनाने मे सफल रहे। उन्होंने अपनी कम्पनी को केवल एक कर्मचारी से बढ़ा कर 2000 कर्मचारियों की कम्पनी बना दिया। केवल यही नहीं उन्होनें कम्पनी की वित्तिय स्थिति को केवल कुछ हजार डालर से बढ़ाकर 300 मिलियन डालर का बना दिया। 2007 में उन्होंने कम्पनी को पेरोट सिस्टमस को बेच दिया तथा एक व्याक्तिगत संस्था की स्थापना की कि जो अमरीका तथा दूसरे देशों में शैक्षिक, संस्कृतिक एवं आर्ट गतिविधियों को संचालित करने मे सहयोग प्रदान करती है।

फ्रेन्क इस्लाम मे नेतृत्व की क्षमता है और उनमें व्यापार करने तथा औद्योगिक विकास की आकांक्षा। उनका कहना है कि ‘‘प्रत्येक व्यापारी और उद्योगपति को अपना एक लक्ष्य तय करना चाहिए। उनका कहना है कि एक सफल व्यापारी को अपनी टीम स्वंय बनानी चाहिए।
फ्रेन्क इस्लाम मूल रूप से भारतीय है और उनके मन में अपने देश भारत के आर्थिक विकास का सपना है। उनका कहना है कि भारत मे बहुत गरीबी है। उनके स्वंय के शब्दों में भारत गरीबी के समुद्र मे अमीरी का एक द्वीप है।

डॉ० फ्रेन्क इस्लाम स्वंय धर्मनिरपेक्ष है और उनके विचार खुले है। वें शान्ति एवं धर्म निरपेक्षता को बहुत महत्व देते हैं वे सर सैयद अहमद खान के विचारों से ही प्रभावित नही है बल्कि बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक पं० मदन मोहन मालवीय के जीवन एवं कार्यों से भी प्रभावित है। उनका कहना है कि ‘‘ये दो महान व्यक्ति सर सैयद अहमद खान और पं० मदन मोहन मालवीय महान दूरदृष्टा थे जिन्होंने विश्व को अपने अपने धर्मों के चश्मों से नहीं देखा बल्कि अपने धर्मों का इस्तेमाल समाज को जोड़ने के लिए किया। उन्होंने सकारात्मक गतिविधियों में रूचि ली न कि नकारात्मक कदम उठाये।

बी०एच०यू० के संस्थापक पं० मदन मोहन मालवीय के बारें में फ्रेन्क इस्लाम लिखते हैं कि, ‘‘पं० मदन मोहन मालवीय ने बताया कि भारत केवल हिन्दुओं को देश नहीं है। यह मुसलमानों, इसाईयों और पारसीयों का भी देश है। देश तभी प्रगति करेगा जब देश के नागरिक आपस में मिल जुलके रहेगें और समाज मे एकता रहेगी।

सर सैयद के बारे में उनका कहना है कि, ‘‘सर सैयद ने हमें बताया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र विश्व में फैल जाऐगें तथा मुक्त विचारों, साहिष्णुता तथा मानवता का प्रचार करेंगें। सर सैयद ने मुस्लिम यूवाओं को परम्परागत शिक्षा और जीवनशैली से निकालकर आधूनिक शिक्षा से जोड़ने का महान कार्य किया।

डॉ० फ्रेन्क इस्लाम का व्यक्तित्व इन दो महान व्यक्तियों से प्रभावित है। यह स्वंय आकलन किया जा सकता है कि जो व्यक्ति सर सैयद और पं० मदन मोहन मालवीय जैसे महान व्यक्तियों से प्रभावित वह स्वंय कितना महान होगा।

डॉ० फ्रेन्क इस्लाम सदैव समाज मे शान्ति एवं सदभाव बनाये रखने के लिए चिन्तित रहते है। उनका कहना है कि ‘‘स्कूल यूवको को केवल शिक्षा प्रदान करने अथवा कौशल विकास के अलावा शान्ति एवं सदभाव का पाठ भी पढ़ा सकते हैं। स्कूलों को धार्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा इस प्रकार प्रदान करनी चाहिए कि वे हमारे प्रजातान्त्रिक मूल्यों और धर्म रिनपेक्ष ढाचें के अनुसार हो। हमें एक एैसी पीढ़ी तैयार करनी है जो आपसी सदभाव और शान्ति को बढ़ावा दे सके।

डॉ० फ्रेन्क इस्लाम के विचारों का दायरा इतना बड़ा है कि उन्हें केवल एक आलेख में बाँधना मुश्किल काम है। उन्होंने धार्मिक, सांस्कृतिक भाषायी और क्षेत्रिय सीमाओं से परे अपने व्यक्तित्व को विकसित किया है। सभी नागरिकों को समान अवसर प्राप्त हो इस मूल भावना पर बहुत कम लोगों ने अपने विचार प्रकट किए हैं परन्तु फ्रेन्क इस्लाम ने न केवल इस पर अपने विचार प्रकट किए बल्कि उन्हें बढ़ावा भी दिया है। वे कहते हैं ’’भेदभाव लोगों के सपनों को चकनाचूर कर देता है और इसलिए विभिन्न धर्मिक वर्गों के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

वे आगे कहते हैं कि, ‘‘मैं ने स्वंय देखा है कि भारतीय लोग किस प्रकार गरीबी से फैसे है। विशेष रूप से अल्पसंख्यक जैसे मुसलमान उनकी आर्थिक स्थिति अति भयावह है। उनका कहना है कि हम सबको एक साथ सभी लोगों को समान अवसर देने के लिए कार्य करना चाहिए।
डॉ० फ्रेन्क इस्लाम विकास के लिए सामाजिक बदलाव पर भी जोर देते हैं। उनका कहना है कि शिक्षा समाज को बदलने मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है क्योंकि शिक्षा के परिणाम स्वरूप बेहतर होगी। उनका मानना है कि इसलिए शिक्षा और रोज़गार लोगों को मिलने चाहिए ताकि समाज से कानून व्यवस्था और शन्ति बनी रहे।

उन्हें भारतीय मुसलमानों के शैक्षिक स्थिति की बहुत चिन्ता है। वे कहते है कि देश के 140 मिलियन मुसलमान शिक्षा सहित प्रत्येक क्षेत्र में पिछड़ रहे हैं और इसके परिणाम स्वरूप उनमें जुर्म बढ़ रहे हैं। कुछ राज्यों मे वे दलितों से भी पिछड़ गए है।
डॉ० फ्रेन्क इस्लाम अमरीका में सफलता पाने के बाद भी अपनी मातृ शैक्षिक संस्था अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को नहीं भूले। जब भी वे भारत आते है वे अमुवि मे आना नहीं भूलते है और उन्हांने समय समय पर अमुवि को वित्तिय अनुदान भी दिया है। परन्तु इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि फ्रेन्क इस्लाम ने अमुवि को कभी भी आर्थिक सहायता दान की भावना से दी है बल्कि उनका मानना है कि वह अगली पीढ़ी के शैक्षिक विकास एवं सशक्तिकरण के लिए निवेश है। फ्रेन्क इस्लाम के विचारों को केवल महान ही नहीं कहा जा सकता है बल्कि उनके दूरगामी परिणाम होंगे। अगर उनके विचारों को उचित रूप से लागू कर दिया जाए तो मुस्लिम समाज आर्थिक विकास की राह पर आगे बढ़ सकता है।


डॉ० फ्रेन्क इस्लाम महिला शिक्षा के प्रति भी काफी गम्भीर है। उन्होंने अल कलाम ऐकेडेमी मे 14 जूलाई 2017 को दिए गए एक भाषण मे कहा ‘‘मेरा विचार है कि यदि हम महिला शिक्षा पर जोर देते है तो वे अपना भाविष्य स्वंय सुधार सकती है। उन्होंने कहा कि मेरा विचार है कि परम्परागत बुनियादी शिक्षा हमारा मूल उद्देश्य होना चाहिए और उच्च शिक्षा मन्जिल। मुसलमानों के बहुसंख्यक परिवार गरीबी से जूझ रहे हैं। यदि लड़कियों को शिक्षित किया जाता है तो कल वह औरत बनेगी, माँ बनेगी, पत्नी बनेगी और अपने परिवार के लिए आर्थिक विकास का माध्यम भी बन सकती है।
कभी कभी मुझे आश्चर्य होता है कि फ्रेन्क इस्लाम ने कोई भी क्षेत्र नहीं छोड़ा है जिस पर अपने विचार प्रकट न किए हो। आज कल के नफरत भरे माहौल पर वे कहते है ‘‘मेरा मानना है कि विभिन्न धर्म, संस्कृतियों और क्षेत्रों के लोक एक साथ कार्य करके सफल हो सकते हैं। हमें आपस में मिल जुल कर राष्ट्रहित मे कार्य करना चाहिए जिससे हमारा समाज भी मजबूत होगा।
वे कहते हैं कि वर्तमान समय मे मुस्लिम यूवा निराश है। वे किसी एक शहर को तो दूसरे धार्मिक वर्गों के आपस मे बाँटते है परन्तु उनमे सामाजिक दूरी रहती है।
डॉ० फ्रेन्क इस्लाम का मानना है कि मुसलमानों को शैक्षिक संस्थानों की स्थापना करनी चाहिए तथा वैज्ञानिक और कौशल क्षमता को भी विकसित करना चाहिए।
फ्रेन्क इस्लाम भारत के विकास के प्रति काफी चिन्तित और गम्भीर है। उनका कहना है कि भारत के पास विकास के लिए संसाधन मौजूद है परन्तु सरकारी नीतियाँ जमीनी स्तर पर लागू होनी चाहिए। वे कहते है प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की वर्तमान केन्द्र सरकार आर्थिक सुधारों के द्वारा भारत को विश्व के आर्थिक शाक्ति के रूप में स्थापित करने मे सफल है।
समाज मे एैसे बहुत कम लोग होते हैं जो सफलता पाने के बाद भी अपनी शैक्षिक संस्था तथा अपने देश के लोगों को याद रखे। डॉ० फ्रेन्क इस्लाम इस समय सफलता के परियावाची बन चुके हैं और मुस्लिम विशेष रूप से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के यूवाओं के लिए एक मिसाल है।

डॉ० जसीम मोहम्मद

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