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अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

अमुवि की तिब्बिया कालिज की अब दुनिया मे धाक होगी।

अलीगढ | यूनानी चिकत्सा पद्धति भारत की एक पुरानी र्चिकत्सा पद्धति है। इसका अपना इतिहास है और लाभ है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का अजमल खान तिब्बिया काॅलेज यूनानी चिकित्सा के क्षेत्र मे एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण शैक्षिक शिक्षण संस्थान है जिसका अपना दवाखाना भी है। समय के साथ यूनानी र्चिकत्सा पद्धति का भी आधूनिकीकरण हुआ है और उसमे नवीन शोधो का समावेश किया गया है। अभी हाल में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (अमुवि) ने मलेशीया की इन्टरनेशनल इस्लामिक यूनीवर्सिटी (आई॰आई॰यू॰) के साथ आपसी करार किया है जिस पर अमुवि की ओर से रजिस्ट्रार और ए॰के॰ तिब्बिया काॅलज में सैहला (यूनानी फार्मंेसी) के अध्यक्ष ने हस्ताक्षर किए है। इसी प्रकार आई॰आई॰यू॰एम॰ (मलेशीया) की ओर से वहाँ के रेक्टर प्रोफेसर दातोसारी जलेहा कमारउद्दीन और डिप्टी रेक्टर (इन्तरनेशनल एवं इन्डस्ट्री तथा कम्यूनीटी रिलेशन) ने 15 मई 2017 को हस्ताक्षर किए हैं।
विदित हो कि इन्टरनेशनल इस्लामिक यूनीवर्सिटी (मलेशीया) वहाँ का एक प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान है जिसका गठन मलेशिया के कानून के अन्र्तगत कोआलमपूर (मलेशीया) मे किया गया है| दूसरी ओर अमुवि का अजमल खान तिब्बिया काॅलेज भी यूनानी चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र में एक पुरातन और प्रतिश्ष्ठिित शैक्षिक संस्थान है। एक लम्बे समय से ए0के0तिबिनया काॅलेज न केवल रोगीयों को यूनानी चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध करा रहा है बल्कि शोध विशेषरूप से सैदला (यूनानी फारमेसी) के क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। अजमल खान तिब्बिया काॅलेज के यूनानी चिकित्सा संकाय की स्थापना 1927 मे हुई थी और संस्थान को शैक्षिक एवं प्रशिक्षण तथा अनुशासन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है जिसके परिणाम स्वरूप न केवल देश बल्कि विदेश में भी छात्र छात्रायें यूनानी चिकित्सा पद्धति के पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने आते हैं। ए0के0 तिब्बिया काॅलेज ने अपने पाठ्यक्रम को इस प्रकार तैयार किया है जिसमें विकास, शोध तथा प्रेरणात्मक विषय महत्व रखते हैं। काॅलेज सफलतापूर्वक शैक्षिक गुणवत्ता के द्वारा देश एवं समाज सेवा मे अपनी भूमिका अदा कर रहा है।
ए0के0 तिब्बिया काॅलेज के अस्पताल मे 75 बिस्तर है और इसके ओ0पी0डी0 में देश के अन्य यूनानी चिकित्सा अस्पतालों से कहीं अधिक रोगी प्रतिदिन आते हैं। ए0के0 तिब्बिया काॅलेज के अस्पताल को त्वचा रोग, क्रोनिक डिजनरेटिव रोग, गेरीटरिक केयर, पाचन रोग तथा रहन सहन से सम्बन्धिक रोगों के इलाज़ में विशेषज्ञता प्राप्त है। काॅलेज मे एलोपैथिक सरजन, एनेस्छियटिस्ट, डाक्टर ओवथोमोलिसिस्ट, ओटोलेरीन आदि भी उपलब्ध है। केवल यही नहीं बल्कि चिकत्सक रसायन शास्त्र, फारमाकोजनोसिस्ट और फारसाको आदि भी उपलब्ध है। अमुवि एवं आई॰आई॰यू॰एन॰ के बीच का आपसी करार एक दूरगामी प्रभाव डालेगा जिसके परिणाम स्वरूप न केवल दोनों संस्थानों को शोधीय लाभ होगा बल्कि यूनानी फारमेसी का भी आधूनिकीकरण सम्भव होगा।
उक्त करार के अनुसार अमुवि का ए0के0 तिब्बिया काॅलेज आई॰आई॰यू॰एम॰ में प्रभावी चिकित्सा पद्धति पर सेमीनारों की श्रंखला आयोजित करेगा तथा वहाँ चिकित्सा सुविधायें की भी स्थापना करायेगा। दोनों ही शैक्षिक संस्थान आपसी शोधीय को सांझा करेंगे तथा सहयोग करेंगे। केवल यही नहीं तिब्बिया काॅलेज का यूनानी चिकित्सा संकाय मलेशीया के छात्रों को बी0यू0एम0एस पाठ्यक्रम में प्रवेश भी देगा। दोनों ही संस्थान अपने अपने प्रोफेसरों का आदान प्रदान करेेंगे। करार का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दोनों ही संस्थान (आई॰आई॰यू॰एन॰) एक दूसरे पर किसी प्रकार का वित्तिय बोझ नहीं डालेगें। करार के अनुसार दोनों ही संस्थानों के इन्टैलेक्चुएल प्रोपर्टी राईट की सुरक्षा उनके देशों के कानून के अनुसार की जाएगी।
उक्त करार के द्वारा दोनों ही शैक्षिक संस्थानों मे यूनानी चिकित्सा पद्धति विशेषरूप से फारमेसी के क्षेत्र में व्यापक विकास होने की आशा है और इसी के साथ आशा है कि यूनानी चिकित्सा पद्धति मलेशीया मे आम होगी।
– डाॅ॰ जसीम मोहम्मद (अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मीडिया सलाहकार है )

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