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अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

सर सैयद के व्यक्तित्व को जितना पढ़ा जाता है उतने ही नऐ आयाम हमें मिलते हैं : प्रो. शकील समदानी



अलीगढ़ 31 मार्चः जो कार्य सर सैयद अहमद खाॅन अन्जाम दे गए उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने जिस समय काॅलेज स्थापित किया साक्षरता बहुत कम थी और शिक्षण संस्था कायम करना बहुत मुश्किल था। उपरोक्त विचार धीरेन्द्र सिंह सचान, मुख्य विकास अधिकारी, अलीगढ़ ने सर सैयद द्विशताब्दी समारोह में आयोजित ‘‘सर सैयद के राजनैतिक विचार एवं शिक्षा की पाॅलिसी नामक विषय पर बोलते हुए डाॅ. बीआर अम्बेडकर हाॅल में बतौर मुख्य अतिथि रखे।

उन्होंने सर सैयद ने यह जान लिया था कि बिना नई शिक्षा प्रणाली के भारतीय अंग्रेजों के समकक्ष नहीं आ पाऐंगे। इसी लिए उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा एवं अंग्रेजों की पद्वति अपनाई जिसमें वो सफल रहे। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि अमुवि से निकले छात्र एवं छात्राऐं केवल देश में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में फैले हुए हैं। उन्होंने सर सैयद मिशन प्रोग्राम के समन्वयक प्रो. समदानी को उच्च कोटि का सेमिनार करने के लिए बधाई दी और छात्रों से आव्हान किया कि वो इस संस्था से अधिक से अधिक फायदा उठा कर सर सैयद के सपनों को साकार करें।

मुख्य वक्ता राजनीतिक विज्ञान के अध्यक्ष प्रो. असमर बेग ने कहा कि सर सैयद ने आधुनिक होने के बावजूद अपनी शखसियत से कोई समझौता नहीं किया।

वो अपने विचारों, अपनी सोच, अपने कार्यों एवं लेख मेें आधुनिक थे बाकी हर चीज़ में वो एक भारतीय मुसलमान थे। प्रो. बेग ने आगे कहा कि यह अफसोस का विषय है कि सर सैयद के व्यक्तित्व पर ज्यादा कार्य पश्चिमी देशों के चिन्तकों एवं लेखकों ने किया है। उन्होंने कहा कि सर सैयद के विचारों को पढ़ने के बाद हमें जीवन में आगे बढ़ने का रासता मिलता है।

प्रोग्राम के समन्वयक प्रो. शकील समदानी ने कहा कि सर सैयद के व्यक्तित्व को जितना पढ़ा जाता है उतने ही नऐ आयाम हमें मिलते हैं।
सर सैयद उच्च कोटि के लेखक, चिन्तक, शिक्षाविद्व, इतिहासकार, ज्यूरिस्ट (कानूनविद्व) एवं सच्चे देश भक्त थे और भारतियों को अंग्रेजों के बराबर खड़ा करना चाहते थे। उनकी धर्म निरपेक्ष छवि पर किसी को कोई शक नहीं होना चाहिए वो राजा राम मोहन राय और टीपू सुल्तान से बहुत प्रभ्ज्ञावित थे और इसी कारण उनमें साहस था और समाज सुधार का काम भी उन्होंने किया। सर सैयद के प्रयासों से अंग्रेजों ने कई कानून पास किए जिसका एक उदाहरण ‘‘काजी एक्ट’’ है। सर सैयद के ही प्रयासों से भारतीयों को चेचक का टीका लगाने की मुहिम शुरू की गई और भारतियों को अंग्रेजों के प्रशासन में प्रतिनिधित्व मिलना आरम्भ हुआ। प्रो. समदानी ने अन्त में कहा कि छात्रों को आज के परिपेक्ष में सर सैयद के आदर्शों को अपनाकर न सिर्फ अपने भविष्य को निखारना चाहिए बल्कि देश को भी विशव पटल पर प्रथम स्थान पर लाने की कोशिश करनी चाहिए। छात्रों को अपना समय खुराफात में बरबाद करने के बजाय अपने और देश के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए लगाना चाहिए।

प्रोग्राम का संचालन फौजा़न शम्स ने किया एवं मेहमानों का स्वागत डाॅ. काज़ी फरीउद्दीन ने किया। अतिथियों का धन्यवाद महबूब इनायती ने किया। गोष्ठी का शुभारंभ निहाल अहमद की किरत से हुआ एवं समापन असलम की दुआ पर हुआ। इस प्रोग्राम को सफल बनाने में लिटरेरी सेकरेट्री अब्दुल कादिर, सीनियर हाॅल वकार सिद्दीकी, खलीक अहमद, मुताहिद, अब्दुल्लाह समदानी, शक्ति सिंह, गौरव, फारान, गुलरेज़, दिलशाद अन्सारी, फैजा आदि का विशेष योगदान रहा।

इस अवसर पर डाॅ. रहमतुल्लाह, डाॅ. इमान, मुगी़स अहमद आदि भी उपस्थित रहे। अन्त में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार दिया गया एवं अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।

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