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अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

सर सैयद जैसा खुलूस दुनियां में अब बहुत कम :प्रो. शकील समदानी

अलीगढ़ 4 मार्चः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खाॅन के द्विशती समारोह के अन्तर्गत ‘‘सर सैयद अहमद खाॅन-रहबर मुल्को मिल्लत’’ विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन उपरकोट स्थित सिराज उल उलूम निसवां काॅलेज में किया गया।

गोष्ठी में बोलते हुए मुख्य अतिथि प्रोफेसर शान मोहम्मद ने कहा कि यदि 1857 का गदर न होता तो सर सैयद विश्व के एक बहुत बड़े इतिहासकार होते। सर सैयद अहमद को इतिहास से विशेष रूचि थी और चाहते थे कि देश के इतिहास को संरक्षित किया जाए। उनकी पुस्तक आसारो सनादीद को पढ़ने के उपरान्त दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों एवं नक्शों का ऐसा ज्ञान हो जाता है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि सर सैयद अहमद खाॅन अरबी के साथ अंग्रेजी भी मुसलमानों को पढ़वाना चाहते थे और इसी कारण उन्होंने एक शानदार संस्था की बुनिया रखी। उन्होंने कहा कि जो कौमे अपने अतीत को भूल जाती हैं वह खत्म हो जाती हैं। अगर सर सैयद लंदन न जाते तो हमें अलीगढ़ इस रूप में न मिलता।

कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. शकील समदानी ने कहा कि सर सैयद जैसा खुलूस दुनियां में बहुत कम लोगों
में पाया जाता है और यह सर सैयद का खुलूस एवं लगन ही थी कि उन्होंने विपरीत परिस्थतियों में 1875 में एक भव्य संस्था की आधारशिला रखी जो आगे चलकर विश्व प्रसिद्व अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बन गया। जिसके कारण देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में शिक्षा की अलख जली। उन्होंने कहा कि सर सैयद न केवल शिक्षाविद थे बल्कि उसके साथ साथ लेखक, चिंतक, दार्शनिक, मुफस्सिर, इतिहासकार, कानूनविद् एवं मुल्क और कौम के सच्चे रहनुमा थे। उनकी अदम साहस एवं मेहनत से न सिर्फ मुसलमानों बल्कि देश में रहने वाले सभी वर्गों को भारी फायदा हुआ। उन्होंने द्विशती समारोह आयोजित करने के लिये अमुवि कुलपति एवं सहकुलपति को धन्यवाद दिया।

सेवानिवृत जज धर्म सिंह ने कहा कि सर सैयद को उस समय मुसलमानों ने गलत समझा जिसके कारण उन्हें दुख झेलने पड़े और परेशानियाॅ उनका मुकद्दर बन गयीं। सर सैयद दूरदृष्टि के मालिक थे और इसी कारण उन्होंने एक ऐसी संस्था कायम की जो न केवल भारतीय उप महाद्वीप में बल्कि पूरे विश्व में अपनी मिसाल आप हैं। श्री धर्म सिंह ने आगे कहा कि अमुवि देश एवं कौम की आवश्यकताओं को पूरा करने में नाकाम है इसलिये उसकी और शाखायें खुलनी चाहिए।

श्रीमती तलत मासूम ने कहा कि सर सैयद के विचारों को सही तौर पर समझने एवं उस पर अमल करने की जरूरत है। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए शहर मुफ्ती मौलाना खालिद हमीद ने कहा कि सर सैयद के एहसान को भुलाया नहीं जा सकता अगर वह न होते तो हमारे हाथ में कुछ भी न होता। काॅलेज के उप प्रबन्धक मोहम्मद मुस्लिम बारी ने कार्यक्रम का संचालन किया एवं अतिथियों का धन्यवाद किया।

इस अवसर पर काॅलेज की प्रिन्सिपल श्रीमती तसनीम अज़रा, पत्रकार एमए शेवन, डाॅ. आफताब अंजुम, मोहम्मद जफर खाॅन, अमुवि के पूर्व छात्र आजम अंसारी, मोहम्मद परवेज, नदीम कुरैशी, पार्षक इरशाद फरीदी, मास्टर जुनैद सिद्दीकी, अब्दुल्ला समदानी, अतीक अहमद, सादिका सिद्दीका, फात्मा जलील, सितवत रिहाना, शवाना शरवत, इमराना जमीर, फरजाना इनियत, राबिया साबिर, अनवर अली अंसारी तथा डाॅ. मोहम्मद शाहिद आदी मौजूद थे..

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