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अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

Vertex events कंपनी की हरकत। बिना अनुमति लिख दिया रवीश का नाम,हंगामा

दुबई।वर्टेक्स इवेंट नाम की दुबई बेस्ड कंपनी जिसने पिछले दिनों अडानी ग्रुप की और से दुबई में एक कराया था जिसमे अमुवि के पी वी सी सहित कई बड़े चेहरे बुलाए गए थे।इस तरह ये कंपनी अपना प्रोफ़ाइल बनाती है । लेकिन इस बार ये विवादों में फस गई है।

इस बार vertex events ने NDTV एंकर रवीश कुमार का नाम बिना सहमति से अपने अमुवि ओल्ड बॉयज के सर सय्यद डे के फंग्शन के कार्ड में लिख दिया। जिसको लेकर रवीश ने अपने अंदाज़ में कंपनी को खूब सीधी सीधी सुनाई।




रवीश ने लिखा।

इस आमंत्रण पत्र में मेरा भी नाम है। 21 अक्तूबर को शारजाह जा रहा हूँ। पहले लगा कि कितनी अफवाहों का खंडन करें लेकिन जब कुछ लोग इसे लेकर उत्साहित हो गए तो लगा कि कर देते हैं खंडन।जब इस देश की जनता में ये पूछने की हिम्मत नहीं बची है कि राजनीति में इतना पैसा कहां से आ रहा है,जिससे इतने महँगे चुनाव हो रहे है तो मैं कहाँ जाऊँ, किससे मिलूं, इसे लेकर मैं हाय राम अब क्या करूँ टाइप फ़ील नहीं करने वाला। नैतिकता की नौटंकी चल रही है क्या। दूसरी बात ये जो आयोजक हैं, हैं भी कि नहीं हैं,इन्होंने ऐसा काम क्यों किया। बोल बोल कर थक गया कि मुझे न बुलायें। इसीलिए फोन उठाना बंद कर दिया है कि ये यहाँ आइये वहाँ जाइये के दबाव को और झेल नहीं सकता। बोलने के लिए कुछ भी नहीं है,न मन करता है और न वक्त है। दो साल से तल्ख़ी से लिख रहा हूँ कि मत बुलाओ। उसे पढ़कर तो लोगों को मुझे फोन करना बंद कर देना चाहिए। तब भी लोग फोन कर देते हैं। दिल्ली के कारण दोस्तों को हाँ कह देता हूँ पर अब वो लोड भी लेना बंद कर दिया है।

ये मैं इसलिए करता हूँ ताकि आप किसी पत्रकार को नायक समझने की मूर्खता न करें। हर विषय का ज्ञाता समझना बंद कीजिये। कुछ को तो सिर्फ बुलाना होता है। टापिक क्या है, जी आप कुछ भी बोल दीजियेगा। मुझे कोई ट्वीट नहीं करना है कि यहाँ आ गया हूँ, फ़लाँ फ़लाँ पर बोलूँगा। हम साधारण लोग हैं। कभी कभी अच्छा काम कर जाते हैं तो हल्की मुस्कान और शुक्रिया काफी है। वो न भी हो तो चलेगा। इतना ही शौक़ है तो हमारे वजूद के लिए खड़े हो जाइये। हमारी स्वायत्ता के लिए लड़ सकते हैं तो वो कीजिये। कुछ नहीं कर सकते तो भी ठीक है। भूल जाइये हमें। जब लोग ये कहें कि आप सरकार की आलोचना क्यों करते हैं तो समझ लेना चाहिए कि सबकी मति मारी गई है। पत्रकार से ये पूछिये कि आप सरकार से सख्त सवाल क्यों नहीं करते ? संस्थान से पूछिये कि वो क्यों नहीं करने देता तो उल्टा पत्रकार से पूछते हैं कि आप सवाल क्यों करते हैं। तो ठीक है फिर फोन कर घटना या ख़बर भी मत बताइये। वैसे भी कौन कर रहा है आम सवालों की पत्रकारिता। आप भी तो वही नौटंकी दाँत चियारे देखते रहते हैं। प्रायोजित डिबेट और प्रोपेगैंडा देखते वक्त इतना तो पता चल ही जाता होगा न कि ये पत्रकारिता नहीं है।

ये सारी बातें तरह तरह से कहता आ रहा हूँ लेकिन हुआ कुछ नहीं। उल्टा ये दुनिया बोलने वाले को ही लटका देने के लिए उतारू है। जैसे नैतिकता का सारा इम्तहान हमीं दें और आप चोर उचक्कों को वोट दे आयें। इसलिए लगता है कि हम अपना काम करें। जब लोगों ने साथ नहीं दिया तो क्या कर सकते हैं। जितना होगा उतना करेंगे। जितना नहीं होगा उतना नहीं करेंगे। आप इसी ब्लाग पर जाकर देखिये कि कितना लिखा है। गुंडों के गिरोह गालियाँ देते फिरते हैं लेकिन दस बीस दर्शकों को छोड़ सब चुप। गाली देने की राजनीतिक संस्कृति परिपक्व हो चुकी है। फिर भी सब चुप। तुम्हारा जहाँ स्वार्थ सधता है, वहाँ तुम चुप रहो। जहाँ नहीं सधता है वहाँ मैं बोल दूँ। कमाल है।मैं टीवी नहीं देखता। इस पर नब्बे फीसदी अमल करता हूँ। इसलिए टीवी में क्या चल रहा है, इसे लेकर भी संपर्क न करें। मन करेगा तो देखूँगा और लगेगा तो यहाँ लिख दूँगा। जो नहीं लिखूँगा वो आप लिखिये। आप नहीं लिख सकते क्या। आपका लिखा हम पढ़ेंगे।

बहरहाल, देश विदेश से बुलाने वालों के प्यार को समझता हूँ। खाड़ी के देशों से कई संगठन बहुत प्यार और आदर से बुलाते हैं। मना करते वक्त दुख भी होता है कि उन्हें ठेस न पहुँचे लेकिन ना कह देता हूँ। वो समझते ही होंगे। लेकिन जब मैं जा नहीं रहा तो मेरे नाम से पोस्टर बनाने की ज़रूरत नहीं है। दफ्तर के काम से ही इतनी जान निकली रहती है कि शनिवार को दुबई या अलवर जाने की हिम्मत बचती नहीं है। स्पाइडरमैन हैं क्या हम। तो शारजाह वाले भैया पोस्टर से नाम हटा दो। जब हम बेरोज़गार होंगे तो महीने महीने कुछ भेज देना।अभी सब ठीक चल रहा है। आजकल आधे से ज़्यादा लोग यही बोलते हैं कि कम बोलो। रोड पर आ जाओगे। लानत है समाज की ऐसी बुद्धि पर। इनके भरोसे हैं ये लोकतंत्र।

शारजाह के पोस्टर को लेकर जो अफवाह फैला रहे हैं,उन्हें इतना तो पता होगा कि हम इंपोर्टेंट हैं। मैटर करते हैं। उनके और उनके सुपर गुंडे के लिए भी। इसलिए वे अफवाह फैलाते रहें वरना सुपर गुंडा बाकी के पैसे नहीं देगा। ये काम चुपचाप करना। नाते रिश्तेदारों को पता न चले,वरना कुँवारे हो तो किसी जनम में शादी नहीं होगी! कोई आनलाइन गुंडों से शादी करेगी क्या ? नहीं न । और शादी हो गई है तो बीबी के मायके में मत बताना वरना लोगों को शर्म आएगी कि दामाद जी राजनीति और विचारधारा के नाम पर अफवाह फैलाने का काम करते हैं और माँ बहन की गालियाँ देते हैं। लेकिन अब दुनिया में आ गए हो और कुछ काम नहीं है तो फिलहाल ये करते रहो। मेरे पास वक्त होता और कुछ बोलने के लिए होता तो शारजाह भी जाता और वैंकूवर भी। अभी मेरा टाइम ठीक नहीं चल रहा। जब चलेगा तो बता दूँगा कहाँ जा रहा हूँ । मस्त रहो दोस्तों। थोड़ा हंसो और हँसाया भी करो.

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