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अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

अमुवि छात्र का वी सी को खुला ख़त।


सेवा में
कुलपति जी
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी
अलीगढ़ - 202001

आदरणीय महोदय
भारत का संविधान स्वतंत्रता का अधिकार, अनुच्छेद 19, 20, 21 और 22 में दी गई है कि संविधान निर्माताओं द्वारा महत्वपूर्ण माना जाता और मैं अनुच्छेद 19 में स्वतंत्रता का अधिकार, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की  मदद से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी  प्रशासन के तानाशाही अंदाज़ की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ ।
छात्र नेता आफाक अहमद को एएमयू प्रशासन ने 6साल के लिए यूनिवर्सिटी से निष्कासित कर दिया है उसने यूनिवर्सिटी परिसर में धरना देने की गुस्ताखी की थी मैं आपको इस सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय का दृष्टिकोण अवगत करना चहता हूँ ।
"सर्वोच्च न्यायालय ने अपने हालिया फैसले में शांतिपूर्ण विरोध को एक सांविधानिक हक करार दिया है। अदालत ने उचित ही कहा है, ‘अभिव्यक्ति की आजादी, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के लिए लोगों को इकट्ठा करना एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी विशेषताएं हैं। हम जैसे लोकतांत्रिक देश के नागरिकों का यह अधिकार है कि सरकार के किसी फैसले या कदम के खिलाफ वे आवाज उठाएं, बल्कि सरकार के ऐसे किसी भी कदम के विरुद्ध अपनी नाराजगी जताने का उन्हें पूरा अधिकार है, जो सामाजिक या राष्ट्रीय महत्व रखता है।"
जिस तरहा से अनुशासन समिति  का फैसला छात्र नेता आफाक के लिए आया है यह  सांविधानिक अधिकारों का हनन है और सर्वोच्च न्यायलय के दृष्टिकोण का अपमान । जिस तरहा से प्रशासन तानाशाही फैसला कर रहा है ,मैं आपको बता देना चाहता हूँ के हम भारत देश में रहते हैं जहाँ संविधान के आधार पर फैसला होता है । 6साल के लिए निष्कासित करना  ग़ैरक़ानूनी निर्णय है इस पत्र के मध्यम से अनुरोध करता हूँ के पुनः अनुशासन समीति हो और छात्र नेता आफाक अहमद को  न्याय मिले ।
अज़फर अली खाँन
छात्र अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी

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