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अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

अमुवि ओल्ड बॉयज डीएम मुरादाबाद ने रिक्शा चालक के घर रोज़ा खोला

मुरादाबाद:


जिलाधिकारी मुरादाबाद ज़ुहर बिन सग़ीर ने आज अपनी पत्नी के साथ एक गरीब मुस्लिम रिक्शा चालक के घर जाकर रोज़ा इफ्तार किया, आम आदमी की तरह डीएम साहब ने आज अचानक एक मोहल्ले में जाकर अनजान व्यक्ति की तरह रिख्शा चालक के घर जाकर किया रोज़ा इफ्तार।


मुरादाबाद के कांठ रोड के नया गाँव में रहने वाले रिक्शा चालक निज़ाम उद्दीन के दरवाज़े पर इफ़्तार की ( मग़रिब ) अज़ान से ठीक पहले एक महिला पुरुष आ खड़े हुए, और अंदर आने की इजाज़त मांगी, इससे पहले निज़ाम उद्दीन कुछ समझ पाते कि ठीक तभी पीछे से दो लोग आये और साथ लाये बड़े बड़े डब्बे निज़ाम उद्दीन के घर के अंदर लाकर रख दिये, तभी मोहल्ले में रहने वाले सलीम ने (जो पेशे से रोज़ सुबहा समाचार पत्र बांटने का कार्य करतें हैं ) ज़ोर से कहा अरे ये तो DM साहब हैं, बस फ़िर क्या था पहले तो आस पास के लोगो को समझ ही नहीं आया कि आख़िर मामला क्या है। उसके बाद जब उन्हें सच पता चला तो, उन्हें ऐसा लगा कि ये तो ठीक वैसे ही शॉट है जैसे शाहरुख ख़ान की एक फ़िल्म आई थी, जिसका नाम था "" बिल्लू बार बार"" उस फ़िल्म में अभिनेता इरफ़ान ख़ान सैलून चलाने का कार्य करतें हैं, और वो बहुत गरीब हैं, और एक दिन अचानक शाहरुख़ ख़ान अपने बचपन के ग़रीब दोस्त इरफ़ान ख़ान के घर पहुँच जातें हैं।


ज़िलाधिकारी और उनकी पत्नी ने एक साथ निज़ामुद्दीन की पत्नी और बच्चों के साथ एक ही चटाई पर बैठ कर इफ़्तार लगा कर अज़ान का इंतज़ार किया और फिर ठीक जैसे ही 07:20 पर मस्जिद से अज़ान के ज़रिये अल्लाह का हुकुम हुआ कि रोज़ा इफ़्तार लो तो सभी ने एक साथ बैठ कर पहले खजूर से रोज़ा इफ़्तार, उसके बाद निजामुद्दीन के घर के अंदर से लाया गया बर्फ़ द्वारा ठंडा किया गया पानी पिया, फ़िर साथ लाइ गये सामान को भी इफ़्तार में शामिल किया गया, 

हमेशा मोहल्ले में ग़रीबी रेखा से निचे गुज़र बसर करने वाले निजामुद्दीन को तो अभी तक ये यक़ीन नहीं है कि उस ग़रीब के साथ आज इतने बड़े शहर के DM साहब ने वो भी अपनी पत्नी के साथ बैठ कर रोज़ा इफ़्तार किया है।


चलते वक़्त ज़िलाधिकारी की पत्नी ने निजामुद्दीन की पत्नी और बच्चों से खेरियत ली और साथ ही  उनकी कुछ आर्थिक मदद कर उन्हें खाने पिने का सामान और ईद के लियें नये नये कपड़े भी दिये।


इस मामले में जब ज़िलाधिकारी से जानना चाहा तो इन्होंने इस बारे में अभी कोई बात नहीं की है, 

लेकिन उनके साथ अलीगढ़ में पड़े डॉक्टर मेराज ने कहा कि सग़ीर साहब का हमेशा से ये मानना है कि किसी को सबसे ज़्यादा ख़ुशी उस वक़्त होती है जब आप किसी को अनचाही ख़ुशी एक दम से दे, और जब ऐसी ख़ुशी को मिलती है तो अल्लाह पाक बहुत खुश होता है, और सग़ीर साहब हमेशा से लोगो को अचानक ख़ुशी देने में यक़ीन रखतें हैं, अगर उन्हें लोकप्रिय होने का शौक होता तो वो आज के इस दौर में हर जगहा दिखने वाली मीडिया को साथ लेकर ज़रूर जाते, डॉक्टर मेराज ने कहा कि आप ज़िलाधिकरी के सभी फ़ोटो देखें जो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुये हैं, वो सब पब्लिक के लोगो द्वारा अपने अपने मोबाईल कैमरे से लियें गए हैं।


फ़िलहाल एक बात तो साफ़ है, आज ज़िलाधिकारी मुरादाबाद ने एक ग़रीब रिक्शा चालक निजामुद्दीन के परिवार के साथ उनके घर जाकर रोज़ा इफ़्तार कर एक नई मिसाल ज़रूर क़याम कर दी है।

1 comment:

  1. Ishwar Kamyabi de or aisi insaniyat sab mein aye

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