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अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

रामपुरी नवाबो के उस्ताद रहे सोराब खान का 150 साल पुराना अखाडा आज भी मिसाल है।

कभी भारत की संस्कृति का हिस्सा रहे देसी अखाड़े अब लुप्त होते जा रहे है। आज विदेश ज़िम क्लब का दौर है। जहा अंग्रेजी वर्जिश का ही चलन है और देसी वर्जिश को भुला दिया गया है जिसके कारण आज अखाड़े खत्म होते जा रहे है।

रामपुर से एक तारीख़ी अखाडा 150 साल से चल रहा है। यहाँ से ऐसे ऐसे उस्ताद आये जिन्होंने न सिर्फ अंग्रेज़ो को अपना लोहा मनवाया बल्कि नवाबो के भी उस्ताद रहे।

अखाडा आज भी चल रहा है लेकिन अंग्रेजी ज़िम के मुकाबले दिलचस्पी कम ही लोग लेते है।

ये अखाडा तफ़ज़्ज़ुल हुसैन खान  ने अंग्रेज़ो के दौर में शुरू किया और बाद में उनके बेटे मोहम्मद हसन खान उर्फ़ उस्ताद सोहराब खा ने इसको पहचान ही।

गौरतलब है देसी अखाड़ो की परंपरा को बढ़ाने के लिए बोलीवूड भी लगातार फिल्म इस मुद्दे पर बनाता है  सलमान खान की आने वाली फ़िल्म सुल्तान भी इसी दंगल पर आधारित है।

1 comment:

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