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Prof. Tariq Mansoor is presently serving as the Vice-Chancellor, Aligarh Muslim University, Aligarh. Previously he has also served as Principal, J.N. Medical College, Chief Medical Superintendent, J.N. Medical College Hospital and Chairman, Department of Surgery. He is also the member of Medical Council of India since March 2015 for a period of four years. He is product of the first batch of prestigious Our Lady of Fatima Higher Secondary School, Aligarh. During his school days he has served as House Captain as well as School Captain. He did his MBBS and MS in General Surgery from Jawaharlal Nehru Medical College, AMU, Aligarh. A surgeon by profession with special interest in Breast and Thyroid Diseases, Prof. Tariq Mansoor has 33 years of Teaching and 35 years of Clinical experience. He has 90 publications to his credit and has guided 49 Postgraduate Medical Students for their Thesis as Supervisor / Co-Supervisor

शिक्षा जिंदगी है और अज्ञानता मौत है : प्रो0 शकील समदानी


अलीगढ़ 07.05.2016
मैडिकल रोड स्थित ग्रीन क्रीसंट पब्लिक स्कूल में ’मदरस डे’ के मौके पर एक संगोष्ठि का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय ’’बच्चों की शिक्षा में माँ का क्या महत्व है।’’ रखा गया । संगोष्ठ को सम्बोधित करते हुए अ0मु0वि0के वरिष्ठ अध्यक्ष एवं ’सरसय्यद अवेयनेस फोरम के अध्यक्ष प्रो0 शकील समदानी ने कहा कि शिक्षा जिंदगी है और अज्ञानता मौत है। एक पढे़-लिखे व्यक्ति को मूर्ख बनाना व भ्रमित करना बहुत मुश्किल है, परन्तु अशिक्षित को बड़ी आसानी से बेवकूफ बनाया जा सकता है। आगे उन्होंने कहा दुनिया के सभी धर्म माँ को अत्यधिक महत्व देते हैं। इस्लाम धर्म के अनुसार माँ के कदमों के नीचे जन्नत है। माँ के हाथ में बच्चे की तालीम और तरबियत है और इसके लिए माँ का शिक्षित होना अति आवश्यक है।
प्रो0 समदानी ने उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत मेें शिक्षा हासिल करने के अनेक अवसर मिलते हैं और हमें उन अवसरों का लाभ उठाना चाहिए । दुनिया में जितनी भी महान हस्तियाँ गुजरी है उनमें अधिकांश वो लोग हैं जिनकी माताओं ने उन्हें बेहतरीन शिक्षा दी थी। छात्र-छात्राओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वो अपने माता-पिता का आदर करें  और ये ध्यान रखें कि जब वो चल भी नहीं सकते थे उस समय उनके माता-पिता ने ही उनको अंगुलि पकड़कर चलना सिखाया था।
अंत में उन्होंने कहा कि हमें अपने घर खर्च को सीमित कर पानी व बिजली बचाने का पूरा प्रयास करना चाहिए। उन्होंने छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकों से वादा लिया कि वो बिजली और पानी बचाने की कोशिश करेंगे और देश की तरक्की मे अपना पूरा सहयोग देंगे।
स्कूल की प्रधानाचार्या सबीहा अनवर मोहसिन ने मातृ-दिवस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसानी रिश्तों में माँ का रिश्ता सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। माँ की गोद बच्चे की पहली पाठशाला होती है। माँ क्या सुनती है, क्या बोलती  आदि बातों का बच्चे के मन मस्तिष्क पर पूरा-पूरा प्रभाव पड़ता है। ऊपरवाले ने माँ और बच्चे का रिश्ता अनोंखा बनाया है। इस रिश्ते को मशहूर शायर मुनव्वर राना ने अपनी नज्म ’माँ’ में बड़ी खूबसूरती से दर्शाया है-

लवों पे उसके बद्दुआ नहीं होती
बस एक माँ ही है जो मुझसे खफा नहीं होती।
इस अवसर पर कक्षा आठ के छात्रों इलमा इरफाान और उमरा सद्दीकी ने विचार व्यक्ति किये माहिर हुसैन और रूमीजा शकील, मिनहा सिद्दीकी और उम्मे हफसा ने माॅ के ऊपर कविताऐं प्रस्तुत की। सलीना , आसिम, शहबाज, सिदरा जावेद, माहीन तथा अरसलान जावेद ने समूह गान पेश किया। समीऊर रहमान ने किरात की सुमराना मुजफ्फर ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा स्कूल के डायरेक्टर अनवर मोहसिन ने महमानों का शुक्रिया अदा किया । अलीन आसिम ने प्रो0 समदानी को गुलदस्ता पेश किया। कार्यक्रम में शिक्षकगण , छात्रगण व उनके अभिभावक उपस्थित थे।

सबीहा अनवर मोहसिन
प्रिंसिपल

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