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अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

टीपू सुल्तान के नाम पर दिया जायगा वीरता पुरस्कार : प्रो0 शकील समदानी

अलीगढ़ 04.05.16। सर सैयद अवेयरनेस फोरम द्वरा टीपू सुल्तान की 217वीं पुण्य तिथि पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें जिले की विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने भाग लिया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुऐ अमुवि के शिक्षक एवं सर सैयद अवेयरनसे फोरम के अध्यक्ष प्रो0 शकील समदानी ने कहा कि जो कौमें इतिहास को भूल जाती हैं और इतिहास से कोई सबक नहीं हासिल करती, इतिहास भी उन्हें भूल जाता है और वो कौम भी इतिहास का एक अधूरा पन्ना बन कर रह जाती है। उन्होंने कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि देश पर मरने मिटने वाले टीपू सुल्तान को देश में उस प्रकार याद नहीं किया जाता जैसा उनका हक है। जिस व्यक्ति ने अपने हुकूमत, खानदान, शानो शौकत और यहां तक कि अपनी जान भी देश को अंगे्रजों के खूनी पंजे से बचाने के लिये दे दी उस व्यक्ति के लिये कोई श्रद्धांजलि देने वाला भी नहीं है और न ही उसके जन्म दिन पर देश में उस प्रकार से कोई आयोजन होता है जिस प्रकार से इससे बहुत निम्न स्तर के लोगों का आयोजन होता है। दुख इस बात है कि अंग्रेजों ने देश पर राज करने के लिये ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के तहत इतिहास के अच्छे लोगों को बुरा पेश करने के लिये ऐसा इतिहास लिखा और लिखवाया जिससे देश के दो बड़े समुदाय लड़ते रहें और वो राज करते रहें। प्रो0 समदानी ने आगे कहा कि ये हर्ष की बात है कि पिछले वर्ष कर्नाटक सरकार ने टीपू की जयंती मनाने का फैसला किया, जिसके लिये कर्नाटक सरकार एवं मुख्यमंत्री बधाई के पात्र हैं। प्रो0 समदानी ने दुखी मन से कहा कि हो सकता है कि टीपू के वंशज के कुछ लोग अच्छी जिन्दगी गुजार रहे हों परन्तु एक बड़ी तादाद ऐसी भी है जो कोलकाता की सड़कों पर रिक्शा चला रहे हैं और फुटपाथ पर चाय बेच रहे हैं। यह पूरे देश के लिये इन्तेहाई शर्म और लज्जा की बात है। उन्होंने देश वासियों से अहवान किया कि वो मैदान में आयें और टीपू शहीद को उसका सही स्थान दिलवायें। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि प्रति वर्ष टीपू के नाम से वीरता पुरस्कार दिया जायेगा एवं निबन्ध प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी।
प्रोग्राम के मुख्य अतिथि डा0 जावेद अख्तर ने कहा कि यदि ईमानदारी की बात की जाये तो देश के इतिहास में ऐसा कोई राजा नहीं गुजरा है जिसने टीपू सुल्तान जैसी कुर्बानी दी हो और वो भी केवल देश के लिये। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिये कि वो सेना में टीपू के नाम पर एक रेजीमेन्ट की स्थापना करें ताकि सैनिकों के दिल में देश के लिये मर मिटने का जज्बा पैदा हो। यूपी राबिता कमेटी के सेक्रेट्री डा0 उबैद इकबाल आसिम ने कहा कि देशवासियों को टीपू सुल्तान के जीवन का अध्ययन करना चाहिये और उन गुणों को पैदा करना चाहिये जो उनमें थे। अलीगढ़ टैक्स बार एसो0 के उपाध्यक्ष राशिद उस्मानी एड0 ने कहा कि श्रीरंगापटनम में स्थित समर पैलेस, टीपू का किला तथा उनका मकबरा इस बात की कसम खाते हैं कि टीपू सुल्तान देश के लिये जान देने वाला पहला देशभक्त था और उसने देश के लिये अपनी हुकूमत तक कुर्बान कर दी।
हेल्पिंग ह्यूमन सोसायटी के अध्यक्ष शोएब अली एड0 ने कहा कि टीपू सुल्तान की बहादुरी और उनकी हिम्मत को देखते हुये भारत सरकार को टीपू सुल्तान के नाम पर वीरता पुरस्कार शुरू करना चाहिये। उन्होंने अमुवि कुलपति जमीरुद्दीन शाह से गुजारिश की कि वो विश्व विद्यालय में टीपू सुल्तान के नाम पर एक चेयर की स्थापना करें। इस अवर पर यूएमओ के काॅर्टीनेटर नजब अब्बासी ने कहा कि टीपू की कुर्बानी और बहादुरी किसी मर्तबे की मोहताज नहीं है लेकिन हमने उन्हें वो मर्तबा नहीं दिया जिसके वो हकदार थे। ताज चेरिटेबल हाॅस्पीटल के चेयरमैन डा0 नजमुद्दीन अन्सारी ने कहा कि अमुवि में और देश के दूसरे विश्व विद्यालयों में भी उनके कारनामों पर सेमिनार का आयोजन किया जाना चाहिये तथा उनकी कुर्बानी को उजागर करना चाहिये। इ अवसर पर फोरम के मीडिया इन्चार्ज अब्दुल्लाह समदानी एवं डा0 खलील चैधरी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस गोष्ठी को कामियाब बनाने में श्रीमती अन्जुम तस्नीम, आयशा अन्सारी, अब्दुल्लाह मारूफी, खलीक अहमद, विक्रम सिंह, अंकित अग्रवाल, अनुराग सिंह, सारा समदानी, शारिक अली, अतीक अन्सारी और श्रीमती परवीन बेगम का विशेष योगदान रहा।
अंत में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास किया गया जिसमें सरकार से अनुरोध किया गया कि वो टीपू सुल्तान के नाम पर वीरता पुरस्कार शुरू करें, उनके नाम पर सेना में रेजीमेन्ट बनाई जाये, केन्द्रीय और राज्य स्तर पर म्यूूजियम की स्थापना की जाये तथा उनके नाम पर स्मारक बनाया जाये। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में उनके नाम पर विभाग खोले जायें तथा टीपू सुल्तान के नाम पर ‘चेयर’ की स्थाना की जाये। इतिहास की सच्चाईयों को जानने के लिये ईमानदार और कठिन परिश्रम के आदी इतिहासकारों की टीम बनाई जाये जो टीपू सुल्तान की सच्चाईयों को उजागर करेे, जैसा कि डा0 बी0एन0 पाण्डेय और भगवान एस0 गिडवानी ने किया।

अब्दुल्लाह समदानी

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