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Prof. Tariq Mansoor is presently serving as the Vice-Chancellor, Aligarh Muslim University, Aligarh. Previously he has also served as Principal, J.N. Medical College, Chief Medical Superintendent, J.N. Medical College Hospital and Chairman, Department of Surgery. He is also the member of Medical Council of India since March 2015 for a period of four years. He is product of the first batch of prestigious Our Lady of Fatima Higher Secondary School, Aligarh. During his school days he has served as House Captain as well as School Captain. He did his MBBS and MS in General Surgery from Jawaharlal Nehru Medical College, AMU, Aligarh. A surgeon by profession with special interest in Breast and Thyroid Diseases, Prof. Tariq Mansoor has 33 years of Teaching and 35 years of Clinical experience. He has 90 publications to his credit and has guided 49 Postgraduate Medical Students for their Thesis as Supervisor / Co-Supervisor

अमुवि को एक बार फिर फौजी वी सी ही चुनना होगा।

दिल्ली। अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी यानि वो इदारा जिसका एक और तो अल्पसंखयक किरदार मिटाने की बात चल रही हो।वही दूसरी और उसके ऑफ सेण्टर पर खतरे में है। ये वो हालात है जो सिर्फ एक तस्वीर बयान कर रहे है बाकि कई ऐसी तस्वीरें भी है जो लोगो के सामने इतनी आसानी से नहीं आती।

कुछ खास लोग जो अमुवि से सीधे तोर पर वाबस्ता है वो उन तीरो से वाकिफ होंगे तो नादान दुश्मन वक़्त बे वक़्त मरता रहता है।

खेर हम बात कर रहे है अमुवि की वी सी की। कौन होगा अमुवि का नया वी सी। आई ए एस होगा। या अकेडमिक होगा। या फिर से फौजी होगा।

अमुवि में आई ए एस वी सी भी रहे है लेकिन उनके साथ कुछ तजुर्बा ऐसा रहा की वो नेताओ से दो कदम पीछे चलते नज़र आते थे। बाकि कहानी पुराने लोगो को मालूम होगी।

अमुवि के वी सी अकेडमिक भी रहे। पढाई का स्टेटस बढ़ाया भी। लेकिन कई करेप्शन देखने को मिले। 

जनरल साहब का कार्य काल देखे तो बहुत कुछ सीखने को मिलता है। यू पी ए 2 और मोदी सरकार दोनों दौर देखे। और कई बड़े हालातो से एक फौजी की तरह लड़ता देखा। जीतता देखा। ज़्यादा डीप में जाने का मोज़ू इस लिए नहीं है की अमुवि के बड़े मुद्दे और मोजुदा हालात जगजाहिर है।

ऐसे में मोजुदा वक़्त का तकाज़ा ये है की हमें एक बार फिर एक फौजी अधिकारी की ही ज़रुरत है ताकि वो अमुवि की ये जंग जीत में बदले। अब चाहे वो मोजुदा पी वी सी ही क्यों न हो।

लेखक
सय्यद आमिर (Alig)

1 comment:

  1. university chalane k lie army ki zarurat nahi hoti hai,Indian govt. lakhon rupee spend kr k army officers ko university chalane k lie nahi banati hai AMU EC members aur courts ko UGC k guideline k mutabiq koe achhe academician ko choose kr k VC banana chahie n ki kisi army man

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