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अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

सय्यद आमिर की कलम से। अमुवि उफ़ ये हतियार। गोलिया। आग के मंज़र । क्या सोचती होगी सर सैय्यद की रूह।

अमुवि में बाहरी युवको की दखल इस कदर  बड़ गई है जिसका तमाशा आज दुनिया देख रही है।अमुवि में दो युवको की हत्तिया इनमे से मोजुदा वक़्त में कोई भी अमुवि का छात्र नहीं है। इस बात का सुबूत है की ये बहरी लोग अमुवि मे गुंडा गर्दी करते है अमुवि के छात्रो से दोस्ती कर उनको भड़काते है। और अमुवि कैम्पस ओर उनको उनको मिलने वाली सहुलतो का गलत इस्तेमाल करते है। आखिर क्यों एक फौजी अधिकारी होते हुए भी वी सी साहब बहरी तत्वों पर कोई कंट्रोल नहीं कर प् रहे है नतीजतन एक के बाद एक हादसे अमुवि की सरज़मीन पर ऐसे घट रहे है की मनो सर सय्यद के जज़्बे से बनी ये मुस्लिम यूनिवर्सटी आज गुंडों का गड नज़र अ रही है। उफ़ ये हतियार। गोलिया। आग के मंज़र । क्या सोचती होगी सर सैय्यद की रूह।

आपको बता दे की पूरा मामला क्या था दरअसल मुमताज़ हॉस्टल में एक छात्र मोहसिन के रूम में पहले आग लगाई फिर जब मामला प्रॉक्टर तक पंहुचा तब तक ये मामला कण्ट्रोल से बहार हो चूका था। बात खूनी संघर्ष तक पहुच चुकी थी।

ताज़ा हालात ये है की कोई जगह रेपिड एक्शन फ़ोर्स तैनात है। हालात इतने नाज़ुक है की अमुवि से बच्चे या तो घर जाने की सोच रहे है या तो अपने हॉस्टल से बहार नहीं जा रहे है।

पुलिस भी पुरे मामले से सकती से निपट रही है।पुलिस उप महानिरीक्षक गोविन्द अग्रवाल ने “यूनीवार्ता” को बताया कि कल देर रात किसी बात को लेकर छात्रों के दो गुट किसी बात को लेकर छात्रावास में भिड गये। छात्रों का एक गुट शिकायत करने प्राक्टर कार्यालय पहुंचा। तत्काल दूसरा गुट भी वहां पहुंच गया। दोनों गुट वहां भी भिड गये। दोनों गुटों ने एक दूसरे पर गोलियां दागीं।

अब ये हालात है इनकी ज़िम्मेदारी किसी न किसी को तो लेनी ही होगी। आखीरकार प्रॉक्टर की एक लम्बी टीम।सी सी टी वी कमरे। और सिक्योरटी के नाम पर करोडो का बजट। और ऊपर से हमारे फौजी अधिकारी वी सी साहब। ये कोई छोटी घटना नहीं। मुझे अफ़सोस है की अमुवि प्रशासन हर बार घटनाये रोकने में नाकामयाब हो रहा है। अब हाई लेवल जाँच कमिटी तक मामला सिमट कर रेह जाता है।

यहाँ हम वी सी साहब से दो अपील बड़े सख्त लहज़े में करते है की एक अमुवि कैंपस में बिना आई कार्ड युवक घुस कैसे रहे है। किसकी लापरवाही रही उस पर कानून कारवाही की जाय। वो कैंपस की फ़िज़ा के साथ साथ बच्चों की जान से भी खेल रहा है। और अगर ज़ाद ज़रूरी हो तो कैंपस की तलाशी लेकर बहरी तत्वों को वहा से तुरंत बहार करे।

कलम से
सय्यद आमिर (Alig)
संपादक
Amunetwork.Com

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