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अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

जामिया छात्र इमरान ने लिखी ये कविता।

कनैहया हमारा भाई है!
दिल्ली पुलिसया कसाई है!!
रामु मांगे,गोलू मांगे!
रहमत मांगे ,नगमा मांगे,मांगे रिहाई है!!
चाचा को गाली देवे,चाची को छेड़े!
पुरे सिस्टमवे से रुसवाई है!!
वामपंथ को दाग़े,अलगवाद को निखारे!
चलचित्र जब देखिब तो संघी भाई है!!
कभी रोहित,तो कभी अखलाक!
सपा-भाजपा मिलकर दंग़ा करवाई है!!                                                          कांग्रेस कहाँ ,आप कहाँ!
सब इक चट्टे गौमाता की पूजा करवाई है!!
पीडीपी से हाथ मिलाई,दंगाई को प्रधान!
दंगो-भ्रस्टाचार को देशभक्ती बनवाई है!!                                                   कनैहया हमारा भाई है!
दिल्ली पुलिसया कसाई है!!

इमरान क्रांति

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