Breaking News

Breaking News English

Urgent::www.AMUNetwork.com needs Part Time campus Reporters.Please Contact:-deskamunetwork@gmail.com
अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

साराह रिफाई का नारी शिक्षा पर लेख।

नारी शिक्षा
कहा गया है जंहा स्त्रियों की पूजा होती है वंहा
देवता निवास करते हैं । प्राचीन काल से ही नारी
को ‘गृह देवी’ या ‘गृह लक्ष्मी’ कहा जाता है ।
प्राचीन समय में नारी शिक्षा पर विशेष बल
दिया जाता था । परन्तु मध्यकाल में स्त्रियों
की स्थिति दयनीय हो गयी । उसका जीवन घर
की चारदीवारी तक सिमित हो गया । नारी को
परदे में रहने के लिए विवश किया गया । स्त्री-
पुरुष जीवन-रूपी रथ के दो पहिये हैं, इसलिए
पुरुष के साथ साथ स्त्री का भी शिक्षित होना
जरुरी है ।
यदि माता सुशिक्षित होगी तो उसकी संतान भी
सुशील और शिक्षित होगी । शिक्षित गृहणी
पति के कार्यों में हाथ बंटा सकती है, परिवार
को सुचारु रूप से चला सकती है । स्त्री-शिक्षा
प्रसार होने से नारी आर्थिक दृष्टि से
आत्मनिर्भर बनेगी। अपने अधिकारों और
कर्त्तव्यों के प्रति सचेत होगी । आदर्श गृहणी
परिवार का आभूषण और समाज का गौरव होती
है ।
स्त्री के लिए किताबी शिक्षा के साथ साथ
नैतिक शिक्षा भी बहुत जरुरी है । स्त्री गृह
कार्य में कुशल होने के साथ साथ वह
समाजसेवा में भी योगदान दे सके । नारी का
योगदान समाज में सबसे ज्यादा होता है । बच्चों
के लालन-पालन, शिक्षा से लेकर नौकरी तक
नारी हर क्षेत्र में पुरुषों से आगे है । अतः नारी
को कभी कम नहीं आंकना चाहिए और उसका
सदा सम्मान करना चाहिए ।

साराह रिफाई
अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी
बी ए( मनोविज्ञान)

No comments:

Post a Comment