Breaking News

Breaking News English

Urgent::www.AMUNetwork.com needs Part Time campus Reporters.Please Contact:-deskamunetwork@gmail.com
अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

AMU "अल्पसंख्यक दर्जे" को लेकर कैंपस में दो तरह की राय

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के "अल्पसंख्यक दर्जे" को लेकर कैंपस में दो तरह की राय रहती हैं. मार्क्सवादी, कम्युनिस्ट, नास्तिक और बेबाक इतिहासकार प्रोफेसर इरफ़ान हबीब [जिनका शोध बाबरी मस्जिद को लेकर बहुत ज़्यादा पुख्ता है] अल्पसंख्यक दर्जे को ग़लत मानते हैं. प्रोफेसर हबीब चीज़ों को "राष्ट्र के सेक्युलर तानेबाने" के वृहत्त परिप्रेक्ष्य में देखते हैं. वहीँ दूसरी तरफ़ अमुवि प्रशासन, यहाँ के छात्रनेता और यहाँ की धार्मिक तंजीमे अपने पक्ष को मज़बूत करते हुए संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 का सहारा लेते हैं. 


अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय वकीलों और जजों की एक "ब्राण्ड" पैदा करता है. क़ानूनी दावपेंच, बहस और तक़रीरें बहुत हो सकती हैं इस मुद्दे पर ! इस मामले में क्या हो चुका है और क्या होना है, वो अपने दायरे से बाहर है. लेकिन जो चीज़ें गौरतलब हैं वो यह कि:
१- सरकार न्यायालय के सामने अपना मत पूरी तरह उलट सकती है. ताज्जुब है !
२- अमुवि प्रशासन क्या यह सुनिश्चित करा सकता है कि अल्पसंख्यक दर्जा मिलने पर मुसलमानों के हालात वाक़ई सुधरेंगे ? मेरा इशारा ख़ुसूसी तौर पर 2005 के बाद कैंपस से भारतीय प्रशासनिक सेवाओं (IAS) में छात्र-छात्राओं की नगण्य चयन संख्या पर है !
३- 1857 के ग़दर के बाद जो चीज़ सबसे पहले सर सय्यद की अक्ल में आई थी वो यह थी कि मुसलमानों की दशा सुधरने के लिए ज़रूरी है कि वो एडमिनिस्ट्रेशन का हिस्सा बनें. ड्यूटी सोसाइटी सिविल सर्विस फण्ड के नाम से एक कोष भी बना था. आज सर सय्यद की उन काविशों का क्या हुआ ?
४- अमुवि प्रशासन बताए कि पिछले 10 साल में कैंपस से कितने चयन आईएएस में हुए. सरकार ने आपको करोड़ो रूपये दिए. आपके साथ जामिया मिलिया इस्लामिया और जामिया हमदर्द को भी दिए गए. उन लोगो ने उम्मीद से बढ़कर काम किया. बहतरीन नतीजे दिए लेकिन आपने मनमोहन सिंह के 20 सूत्रीय प्रधानमंत्री कार्यक्रम के ज़रिए करोड़ो रूपये ख़र्च करके कैंपस से "एक" भी सिलेक्शन आईएएस में नहीं दिया !!
५- हमारे महनती कुलपति अमेरिका, दुबई, लन्दन तक जा जाकर महनत कर रहे हैं ताकि यूनिवर्सिटी में तालीम आला दर्जे की हो, 2020 तक यूनिवर्सिटी देश की नंबर वन यूनिवर्सिटी बने. उनकी मेहनतें रंग ला रहीं हैं, उपलब्धियों को आप नकार नहीं सकते. लेकिन दुःख होता कि आईएएस में चयन की तरफ़ कुलपति साहब ध्यान नहीं देते. वजह साफ़ है. आईएएस में चयन से युनिवर्सटी की रैंक न सुधरती है, न बिगड़ती है. फिर कोई क्यूँ कैंपस के बाहर जमालपुर में तयारी कर रहे छात्रों की सुध लेगा !!
६- प्रोफेसर ज़ियाउद्दीन खैरूवाला और प्रोफेसर असमर बेग जैसे क़ाबिल और दिग्गज समझे जाने वालों को आपने रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी का निदेशक बनाए रखा ! उन्होंने क्या नतीजे दिए इसकी कहीं कोई जवाबदेही तय नहीं की जाती ! दरअसल निदेशक की ज़िम्मेदारी किसी प्रोफेसर को "पार्टटाइम" तौर पर दी जाएँगी तो नतीजे भी "पार्टटाइम" जैसे आएंगे. कमी प्रोफेसरों की नहीं है, प्रशासन की है.
७- जब तक सिविल सेवाओं के प्रति आप गंभीर नहीं हैं, आपके अल्पसंख्यक दर्जे कुछ नहीं उखाड़ सकते !

Muhammad Naved Ashrafi

No comments:

Post a Comment