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अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

अमुवि अल्पसंख्यक मामला : क्या केंद्र सरकार दिल्ली विश्वविद्यालय" के अंतर्गत चल रहे 6 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के भी खिलाफ है।

छीन लो "अल्पसंख्यक टैग" पर सबका :-

आपकी दलील है कि इस देश में शिक्षण संस्थानों में समान अधिकार सबको मिलना चाहिए तो अपनी बात पर अड़े रहिएगा क्युँकि मुझे मालूम है कि फिर पलट जाओगे ।

इस देश में यदि "अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय" और "जामिया मीलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय" से अल्पसंख्यक संस्थान का टैग खत्म करना है तो कर दो पर फिर दोगलापन मत दिखाना और इन दोनो का खत्म करके जब "सामान्य विश्वविद्यालय" का टैग दे देना तो उसी नीति पर चल कर केन्द्रीय "दिल्ली विश्वविद्यालय" के अंतर्गत आने वाले यह 6 अन्य शिक्षण संस्थानों के "अल्पसंख्यक टैग" को भी समाप्त कर देना और फिर देखना कि कैसे "तनखैय्या" घोषित किये जाते हो और यह जो 56" का सीना है ना ? उसके टुकड़े टुकड़े बटोरते फिरोगे जब सिख म्यान से तलवारें कटारें निकाल कर कीमा बना देंगे ।

देश में सिर्फ "अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय" और "जामिया मीलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय" ही "अल्पसंख्यक टैग" प्राप्त शिक्षण संस्था नही है बल्कि केवल दिल्ली में 4 सिख संस्थाएँ हैं और 2 इसाई शिक्षण संस्थाएँ हैं जो सिख और इसाईयों के लिए 50% कोटा दे रही हैं ।

1- एस जी टी बी खालसा कालेज ।
2-गुरुनानक देव खालसा कालेज , देवनगर
3- श्री गुरुगोविन्द सिंह कालेज आफ कामर्स , पितमपुरा।
4-माता सुन्दरी कालेज फार वोमेन ।

"शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी" के प्रबंधन में चलने वाले इन चारों का कालेज का "अल्पसंख्यक टैग" छीन लेना तो दो इसाईयों के भी कालेज हैं और हिम्मत हो तो फिर इनका भी "अल्पसंख्यक टैग" छीन लेना और देखना कि अमेरिका और इंग्लैंड किस तरह उसी 56" के सीने की हवा निकाल देते हैं जैसे एक ग्राहम स्टेन्स और उसके बच्चों को जलाकर मारने पर निकाली कि आज तक इसाईयों की तरफ टेढ़ी नजर भी नहीं होती ।

1- सेन्ट स्टिफेन्स कालेज
2- जीसस ऐन्ड मैरी कालेज

उपरोक्त सभी 6 कॉलेज "दिल्ली विश्वविद्यालय" के अंतर्गत आते है जबकि मुसलमानों द्वारा स्थापित केवल एक "मुस्लिम यूनिवर्सिटी" जामिया और एक उत्तर प्रदेश में "अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय" है जो आखों की किरकिरी बनी हुई है ।

मजेदार तथ्य देखिए कि चंडीगढ़ और हरियाणा उच्च न्यायालय यह फैसला देती है कि पंजाब में सिख अल्पसंख्यक नहीं हैं तो तुरंत पंजाब सरकार एक अध्यादेश लाकर उच्च न्यायालय के फैसले को पलट देती है और इसी अध्यादेश के आधार पर "उच्चतम न्यायालय" पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा देती है।
कितना इन्टरेस्टिंग है ना सुनना कि पंजाब में अपने सिख भाई "अल्पसंख्यक" हैं ? पर शाहबानों पर घड़े घड़े आँसू बहाने वाले ढपोरसंखी इस अध्यादेश पर कुछ नहीं बोलेंगे । बोलेंगे तो सिख "जूता" साफ करवा देंगे और पंजाब से लेकर जम्मू तक पूरी व्यवस्था को बंधक बना देंगे । इनकी लाठी बस कमजोरों पर चलती है ।

चलो हिम्मत है तो करो एक तरफ से "अल्पसंख्यक टैग" समाप्त । नहीं तो कहता रहूँगा कि यह व्यवस्था मुसलमानों के लिए दोगला रवैया रखती है ।

http://www.tribuneindia.com/2011/20110720/main4.htm

http://www.academics-india.com/Sikh-story.htm

FBP/16-17
मोहम्मद ज़ाहिद की ऍफ़ बी पोस्ट से।

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