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अलीगढ़ ::एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का सेवा काल सेना के इतिहास में स्वच्छ, अनुशासनप्रिय एवं वीरता की गाथाओं से परिपूर्ण है।

Heart touching Urdu poem 'Inquilab' written by 'Sharjeel Usmani',AMU student

Urdu poem titled 'Inquilab' portraying the current political scenario of the nation.
Written by 'Sharjeel Usmani', student of Diploma Engg at Aligarh Muslim University.
इंसानियत तो तब मरती की जब वो इंसान होते,
आपने उन्हें इंसान कह हमें फ़रिश्ता कर दिया।
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गर आज़ादी का जश्न अब मन चुका, ज़रा कश्मीर को देखिये,
जम्हूरियत का राग गा, ये कैसा क़िस्सा रच दिया।
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कभी अयोध्या, कभी गाय, कभी गौमांस तो कभी घर की वापसी,
हँसते-खेलते से मुल्क़ का पल भर में दो हिस्सा कर दिया।
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पहले सड़क पर दरिंदगी, फिर अदालत का फैसला ,
लो हमने भी मोमबत्ती लिए सरकार को निकम्मा कह दिया।
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मुज़फ्फरनगर की आँखों के आंसू अभी सूखे भी न थे ,
की उसने सैफई में सालगिरह का जलसा कर दिया।
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और राज़ बाक़ी तो तब खुलेंगे जब आएगा चुनाव,
हमने अभी से मोदी-मुलायम को दो पहलु एक सिक्का कह दिया।
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इनकी बेशर्मी, इनकी गैरत, ज़रा देखिये मजाल इनकी,
गांधी को क़त्ल कर, नाथू को सच्चा कह दिया।
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उठाई ऊँगली, दिखाई आँखें, उछाले तल्ख़ सवाल तुमने,
लो अब केजरीवाल को भी तुमने मुस्लमान का मदरसा कर दिया।
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जो क़ैद की न तुमने गुजरात सी हसरतें,गुजरात सी हरकतें,
हम भी मुत्तहिद हुए और बिहार कर दिया।
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पूछा जो हमने इंक़लाब से की कब आओगे,
                             उसने भी पुचकार कर तुझे ए ‘शरजील’ बच्चा कह दिया।    

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