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Prof. Tariq Mansoor is presently serving as the Vice-Chancellor, Aligarh Muslim University, Aligarh. Previously he has also served as Principal, J.N. Medical College, Chief Medical Superintendent, J.N. Medical College Hospital and Chairman, Department of Surgery. He is also the member of Medical Council of India since March 2015 for a period of four years. He is product of the first batch of prestigious Our Lady of Fatima Higher Secondary School, Aligarh. During his school days he has served as House Captain as well as School Captain. He did his MBBS and MS in General Surgery from Jawaharlal Nehru Medical College, AMU, Aligarh. A surgeon by profession with special interest in Breast and Thyroid Diseases, Prof. Tariq Mansoor has 33 years of Teaching and 35 years of Clinical experience. He has 90 publications to his credit and has guided 49 Postgraduate Medical Students for their Thesis as Supervisor / Co-Supervisor

AMU में आफ़ाक़ अहमद का अनिश्चितकालीन धरना शुरू


आज दिनांक 22 दिसंबर 2014 को दिन में 12 बजे कुलपति आवास के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया है. विदित रहे कि मॉस कम्युनिकेशन से पी.एच.डी कर रहे आफ़ाक़ अहमद को कोर्स वर्क के फर्स्ट पेपर में 2 अंक से फ़ेल कर दिया गया था. तलबा के हक़ की पामाली पर हमेशा से आवाज़ बुलंद करने की वजह से लम्बे वक़्त से ही इंतजामिया के कोप-भाजन का शिकार रहे आफ़ाक़ अहमद के Course Work के दोनों पेपर की आंसर-शीट external examiner के पास भेजी गयी थी; जबकि अमूमन एक ही पेपर चेक होने के लिए बाहर भेजा जाता है. इससे साफ़ ज़ाहिर होता है की सेटिंग करके महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्विद्यालय, वर्धा भेजे गए पहले पेपर को जिसे प्रोफ़ेसर अनिल के अंकित ने चेक किया था और इसी पेपर के सेशनल में कम नंबर देकर एक सोची-समझी सेटिंग के तहत महज़ 2 नंबर से फ़ेल कराया गया जिससे मेरे भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा सके और इंतेज़ामिया को भरष्टाचार करने के रास्ते साफ़ हो जाएँ!ज़ाहिर तौर पर कोर्स वर्क पास करना एक औपचारिकता भर है पर इंतजामिया ने जान-बूझकर हमारे लिए इसे जीवन-मरण का प्रश्न बना दिया है और इसीलिए इसको लेकर जब पुनर्मूल्यांकन की अर्ज़ी दी गयी तो इसे 2 महीने तक लगातार टाला जाता रहा... और जब कुलपति ने इस पर फैसला सुनाया तो AMU Act, 1981 की खुल्लम-खुल्ला धज्जियाँ उड़ाते हुए इसे बाहरी परीक्षक को भेजने का आदेश सुनाया है...जो कि Ordinaces की खिलाफ़वर्ज़ी है और यूनिवर्सिटी के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ जब बाहरी परीक्षक को पुनर्मूल्यांकन की कॉपी जांचने के लिए भेजी गयी हो! छात्र नेता आफ़ाक़ अहमद का कहना है की तलबा के हित में हमेशा खड़े रहने, तलबा के मुद्दों को बराबर उठाते रहने और इंतेज़ामिया के भरष्टाचार को उजागर करते रहने की वजह से उन्हें जान-बूझकर सोची-समझी साज़िश के तहत बदले की भावना से प्रताड़ित किया जा रहा है...जिसका वो लोकतांत्रिक ढाँचे के साये तले डटकर मुक़ाबला करने को तैयार हैं!


आफ़ाक़ अहमद का कहना है की अक्टूबर 2013 से कुलपति ने उनकी नॉन-NET फ़ेलोशिप रोक रखी है और मानसिक तौर पर उन्हें तोड़ने का काम किया जाता रहा है! ये धरना तब तक चलता रहेगा जब तक उनके हक़ में फ़ैसला नहीं हो जाता है. इस सम्बन्ध में आफ़ाक़ अहमद ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय सहित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अल्पसंख्यक आयोग को पत्र प्रेषित किया है जिसमें उन्होंने न्याय की गुहार लगाई है! AMU छात्र संघ से भी मामले में तत्काल प्रभाव से हस्तक्षेप करने की बात कही गयी है! इस दौरान कुलपति को सम्बोधित एक 14 सूत्रीय ज्ञापन प्रॉक्टर के माध्यम से धरना-स्थल पर ही सुपुर्द किया गया...जिसमें पी.एच.डी. कोर्स वर्क में पास मार्क्स 50% से घटाकर PG कोर्सेज की तरह 40% करने, डाइनिंग हॉल्स में व्याप्त भरष्टाचार को जड़ से ख़त्म करने, विभिन्न कोर्सेज के फॉर्म्स और फीस के ढाँचे में 90 फ़ीसदी तक कमी करने, फैकल्टी-वाइज होस्टल्स के अलॉटमेंट और उसी फैकल्टी के प्रोवोस्ट्स और वार्डेंस की तैनाती रोकने, अल्पसंख्यक स्वरुप के मुद्दे को लोकसभा में उठाने की कार्रवाई करने, मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी 24 घंटे खोलने और +2 स्टूडेंट्स को इसमें पढ़ने की इजाज़त देने, "सेंट्रल स्टूडेंट्स कैंटीन" के नाम से यूनिवर्सिटी की कैंटीन 24 घंटे खोलने और सारे हॉल्स में कैंटीन की सुविधा 24 घंटे तक बहाल रखने, बिना वजह कैंपस में पुलिस के घुसने और पुलिस प्रशासन के अनियंत्रित हस्तक्षेप पर रोक लगाने, स्टूडेंट को बिला-वजह या बिना ठोस सबूत के निलंबित करने पर अंकुश लगाने और सस्पेंड किये जाने पर होने वाली Disciplinary Committee (DC) के दौरान स्टूडेंट को रिप्रजेंटेशन के तौर पर अपना केस डिफेंड करने के लिए "स्टूडेंट्स रिप्रेजेन्टेटिव" का गठन करने, AMU इंतेज़ामिया की कठपुतली बनकर काम करने वाली "स्टूडेंट्स ग्रीवांस रिड्रेसल कमेटी" को तत्काल प्रभाव से भंग करने और AMU Court की तरह Academic Council में भी स्टूडेंट्स के रिप्रजेंटेशन के लिए फैकल्टी-वाइज अकादमिक कौंसिल के चुनाव कराये जाने, अकादमिक सत्र में 2 बार एम.फिल./ पी.एच.डी. के नोटिफिकेशन और एम.फिल./ पी.एच.डी. के प्रवेश की सारी औपचारिकता एक महीने के भीतर ख़त्म करने की मांग प्रमुखता से शामिल है!

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